शहरी विकास और परिवहन

मध्य प्रदेश में पहले से ही बड़ी तादाद में मौजूद शहरी आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है। आने वाले दशकों में यहां शहरीकरण और तेज होने की उम्मीद है। आकलन है कि वर्ष 2026 तक राज्य की कुल आबादी का 34 फीसदी सिर्फ शहरों में रह रहा होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में 8 फीसदी हिस्सा परिवहन का होता है। इसी तरह परिवहन से होने वाले जीएचजी उत्सर्जन में से 94.5 फीसदी सिर्फ सड़क परिवहन की वजह से होता है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य सड़कों को मिला कर कुल 74,000 किलोमीटर सड़कें हैं। यहां प्रति हजार आबादी रजिस्टर्ड वाहनों का औसत 80 है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत सिर्फ 68 है। पर्याप्त और प्रभावी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की कमी की वजह से राज्य में निजी वाहनों पर निर्भरता अधिक है। राज्य में पैदा होने वाली ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा शहरी आबादी ही उपयोग कर लेती है। इसमें रिहायशी और औद्योगिक दोनों तरह के उपयोक्ता शामिल हैं। शहरों की बढ़ती आबादी और आकार के बाद कचरे का प्रबंधन भी एक नई चुनौती है। इसी तररह शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन को ले कर बहुत प्रयास करने की जरूरत है। शहरों में हरित इलाकों में आ रही कमी की वजह से वहां अचानक तापमान में काफी बढोतरी आ रही है। अपने आस-पास के इलाकों से इन शहरों का तापमान ज्यादा होता जा रहा है।  

मुख्य रणनीतियाँ

  • रहवासी और व्यावसायिक क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को सुनिश्चित करना 
  • शहरों में वर्षाजनित बाढ़  प्रबंधन का विकास करना 
  • कचरा प्रबंधन एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन को कुशलता से करना 
  • टिकाऊ शहरी परिवहन एवं रेलवे के माध्यम से आवागमन सुविधाओं का विकास 
  • नियंत्रित एवं सुनियोजित शहरी विस्तार 
  • कुशल शहरी जल वितरण तंत्र का विकास 
  • नियंत्रित और निगरानीपूर्ण भूमिगत जल दोहन 
  • टिकाऊ आधारभूत संरचना और पानी के बेहतर उपयोग की आदतों को बढ़ावा देना 
  • जलवायु अपरिवर्तन संबंधी शोध और विकास पर जोर देना 
  • योजना निर्माण और क्रियान्वयन में जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंताओं को शामिल करने के लिए संस्थागत और कर्मचारी क्षमता वर्धन करना

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