पंचायत एवं ग्रामीण विकास

मध्य प्रदेश ग्राम प्रधान राज्य है। यहां के 54,903 गांवों की अधिकांश आबादी कृषि और दूसरी प्रकृति आधारित आजीविका पर ही निर्भर है। बदलती जलवायु के प्रभाव से निपट पाने में गरीब आबादी सबसे ज्यादा मजबूर होती है। उधर, राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण विकास की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में कई क्षेत्र शामिल होते हैं। अब जरूरत है कि इन सभी योजनाओं और कार्यक्रमों को इस तरह नया रूप दिया जाए कि वे जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने में यहां के लोगों को सक्षम बना सकें। इस लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती है गांव के लोगों में जलवायु परिवर्तन के कुप्रभावों के बारे में जागरुकता की कमी। लेकिन यह भी सच है कि अपनी आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर लोगों को बहुत आसानी से समझाया जा सकता है कि उन्हें अब अपने संसाधनों की हिफाजत का भी ध्यान रखना होगा।

मुख्य रणनीतियाँ 

  • जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में वर्त्तमान विकास कार्यक्रमों का मूल्यांकन करना और उन्हें अधिकाधिक जलवायु परिवर्तन प्रतिरोधी बनाना 
  • भूमि और जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि व पशुपालन और चारा उत्पादन की आवश्यकता इत्यादि  मुद्दों पर ग्रामीण समुदायों का  प्रशिक्षण और क्षमता वर्धन करना 
  • पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना में जलवायु परिवर्तन चिंताओं को संस्थागत ढंग से शामिल करना . 
  • जलवायु परिवर्तन जनित जोखिमों से संबंधित बीमा और ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराना. 
  • प्रदेश के गाँवों में कार्बन उत्सर्जन और कार्बन अवशोषण का उचित संतुलन बना रहे इस दिशा में  संभावनाओं की तलाश करना.
  • जलवायु परिवर्तन संबंधी शोध और विकास पर जोर देना 

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