स्वास्थ्य

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का ऐसे दूसरे देशों के मुकाबले भारत पर ज्यादा असर पड़ेगा। इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, आबादी में अत्यधिक विविधता और कार्बन आधारित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता इसका सबसे बड़ा कारण है। मध्य प्रदेश भारत के उन छह राज्यों में शामिल है, जहां मलेरिया के 65 फीसदी मामले होते हैं। नवजात मृत्यु दर (आईएमआर) के लिहाज से देश के सबसे बुरी स्थिति वाले सौ जिलों में 30 इसी राज्य के हैं।

राज्य में लोगों के स्वास्थ्य की पहले से खराब होती स्थिति को जलवायु परिवर्तन और प्रभावित करेगा। राज्य का स्वास्थ्य विभाग विभिन्न बीमारियों के प्रभाव का आकलन करने में जुटा है। इसके लिए राज्य ने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) चलाया है। मलेरिया की पहचान के लिए किट गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं। लेकिन समय के साथ जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छर और जल जनित रोगों के बढ़ने की आशंका तो है ही, तापमान और जलवायु में होने वाले उतार-चढ़ाव से होने वाले संक्रमण के भी बढ़ने का डर है। राज्य में दवाओं के गलत भंडारण और उपयोग की वजह से कई मामलों में दवाओं का प्रभाव नहीं हो रहा। सांस संबंधी बीमारियों और एलर्जी के मामलों में भी तेजी आ सकती है।  

मुख्य रणनीतियाँ 

  • विभिन्न समुदायों की बीमारियों के सम्बन्ध में जानकारी लेना और रूपरेखा का निर्माण करना  
  • मौसम आधारित दुर्घटना व बीमारियों  की समय से पहले चेतावनी देने वाले तंत्र का विकास करना 
  • महामारी फैलने की संभावना को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन तैयारियों को बढ़ावा देना 
  • जिन इलाकों में पर्याप्त सुविधाएँ और पहुँच नहीं है वहाँ बीमारी की घटनाओं का शीघ्र पता लगाना और उनपर नियंत्रण पाना.
  • पर्यावरण प्रबंधन के लिए बेहतर पूरक उपायों का निर्माण करना 
  • जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय पर जन-जागरूकता निर्माण करना 
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए औषधि वितरण में बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को बढ़ावा देना और औषधि भंडारण के लिए मजबूत आधारभूत संरचना का निर्माण करना 
  • चिकित्सा और अस्पताल संबंधी कचरों के प्रबंधन के लिए कड़े क़ानून बनाना 
  • जलवायु परिवर्तन संबंधी शोध और विकास पर जोर देना 
  • योजना निर्माण और क्रियान्वयन में जलवायु अपरिवर्तन संबंधी चिंताओं को शामिल करने के लिए संस्थागत और कर्मचारी क्षमता वर्धन करना 

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