वानिकी

कुल भूभाग के 31 फीसदी में वन से आच्छादित मध्य प्रदेश राज्य जैव और वनस्पति विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध है। इस वन आच्छादित क्षेत्र में 9 राष्ट्रीय पार्क, 25 वन्यजीव अभ्यारण्य, 2 बायोस्फीयर रिजर्व और 5 टाइगर रिजर्व शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में ऐसे गांव हैं, जिनकी आबादी लगभग पूरी तरह वनों पर आश्रित है।

बदलती जलवायु की वजह से इस वन क्षेत्र का प्रसार और इसका स्वरूप दोनों ही प्रभावित हो सकता है। राज्य एक बड़ी आबादी जिनकी जीविका जंगल से मिलने वाले जलावन, चारे और ऐसी दूसरी चीजों पर आधारित है, उन पर इसका व्यापक असर होगा। इसी तरह बदलती जलवायु की वजह से जंगली प्राणी भी अनुकूल मौसम की तलाश में अपना ठिकाना बदलने की कोशिश में जुट जाएंगे। वन्य प्राणियों के बड़ी संख्या में नई जगह की तलाश में निकल पड़ने पर इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष की घटनाओं में भी इजाफा हो सकता है।

इसी तरह विभिन्न इलाकों के लिए पूरी तरह नई प्रजाति के जीव भी वहां आ सकते हैं। इनके आने से वहां पहले से मौजूद जीवों के अस्तित्व को नए सिरे से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर वन क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखा पड़ता रहा तो दावानल की घटनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही जंगल की ये आग और भयानक रूप ले सकती हैं।

मुख्य रणनीतियाँ 

  • विभिन्न वन प्रकृतियों व प्रकारों के अनुसार कार्य योग्य वन प्रबंधन योजनाओं का निर्माण करना 
  • संभव और सहज उपायों से वन संरक्षण, पौध रोपण को बढ़ावा देना. विशेष रूप से जिन इलाकों में जंगलों का सफाया हो चुका है वहाँ क्षतिपूर्ति स्वरुप पौध रोपण को बढ़ावा देना. 
  • टिकाऊ वन प्रबंधन कार्यनीति के तहत भूमि और जल संरक्षण उपायों को प्राथमिकता देना 
  • वैकल्पिक ऊर्जा साधनों के विकास द्वारा इन्धन के लिए वनों पर निर्भरता कम करना 
  • वन्य प्रजातियों के सुरक्षित आवागमन के लिए सुरक्षित गलियारों का निर्माण करना 
  • वनोंपाज आधारित आजीविका अवसरों को प्रोत्साहित करना. इसके लिए बाज़ार से बेहतर सम्बन्ध बनाने हेतु सहयोग और विकास करना.
  • जलवायु परिवर्तन संबंधी शोध और विकास कार्यों पर विशेष जोर देना 
  • मध्यप्रदेश के वनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करना 
  • प्रदेश के वनों और वन प्रकारों पर जलवायु परिवर्तन प्रभावों के बारे में जागरूकता निर्माण करना

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