पर्यावरण सम्बन्धी कानूनों का पालन बहुत जरुरी है: श्री एम्.सी.मेहता

श्री एम्.सी.मेहता
श्री एम्.सी.मेहता
द्वारा प्रकाशित-अगस्त 30, 2014
विषय-वस्तु: पर्यावरण

भारत के पास एक बहुत अच्छी पर्यावरण नीति है, उसके बावजूद पर्यावरण बिगड़ता जा रहा है. इस सन्दर्भ में हम कैसे सुनिश्चित करें कि हमारे प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें ?

श्री मेहता: भारत में पर्यावरण से सम्बंधित कई सारे क़ानून हैं. लेकिन दुर्भाग्य से अधिकाँश क़ानून सिर्फ कागजों पर ही हैं. उनका पालन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है, इसीलिये हमारा पर्यावरण बिगड़ रहा है. हमने अपनी नदियों, तालाबों, झीलों, और यहाँ तक कि भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर दिया है. कई सारे क़ानून होने के बावजूद सरकारों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने उन कानूनों के पालन के लिए बहुत कम काम किया है. आज के समय की आवश्यकता ये है कि इन कानूनों के बारे में आम जनता में जागरूकता आनी चाहिए.  

मध्यप्रदेश सरकार जलवायु परिवर्तन का सामना करने की दिशा में बहुत सारे प्रयास कर रही है. इस सम्बन्ध में जन सहभागिता से सरकार को क्या मदद मिल सकती है?

श्री मेहता: मध्यप्रदेश सरकार को पर्यावरण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए और प्रदूषण को उसके स्त्रोत पर ही रोकने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है. चाहे मध्यप्रदेश हो या कोई अन्य राज्य हो, जलवायु परिवर्तन विशिष्ठ भौगोलिकताओं से सम्बंधित समस्या है. इस दिशा में पर्यावरण सम्बंधित विषयों पर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है. इन अध्ययनों के परिणामों को जनसामान्य के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता है ताकि लोगों को पता चल सके कि वास्तव में समस्या क्या है. जाहिर सी बात है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए किसी तीसरे आदमी के आने की उम्मीद लगाए हम नहीं बैठे रह सकते. बल्कि हमें ही इन मुद्दों को सुलझाना होगा. मध्यप्रदेश सरकार को युवाओं पर ख़ास ध्यान देने की आवश्यकता है, इसके लिए स्कूलों, कालेजों के पाठ्यक्रम में पर्यावरण विषय को शामिल करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य की पीढ़ियों को जलवायु परिवर्तन के बारे में पर्याप्त जागरूक रहे.

क्या बदलती जलवायु से भारत की सांस्कृतिक विरासत पर असर पड़ेगा?

श्री मेहता: ताज महल को देखिये, और प्रदूषण के कारण इसकी बदलती रंगत को देखिये. इसे देखकर हम कह सकते हैं कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों पर निश्चित ही असर पड़ना शुरू हो गया है. केंद्र और राज्य सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए वरना हम ये अमूल्य विरासत खो देंगे. संस्कृति मंत्रालय को इस दिशा में विशेष इकाई का गठन करना चाहिए जो इस दिशा में स्मारकों और अन्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की निगरानी कर सके. इन सूचनाओं को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि आम जनता भी ये समझ सके कि भविष्य के लिए क्या आवश्यक कदम उठाये जाने हैं.  

आप दक्षिण एशिया क्षेत्र में पर्यावरण मुद्दों पर कार्य कर रहे हैं. आपके अनुभव में जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी अपने कार्यों में अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारत किस स्थिति में है ?

श्री मेहता: भारत जलवायु परिवर्तन का सामना करने की दिशा में एक अगुआ बन सकता है. भारत का अन्य दक्षिण एशियाई देशों पर खासा प्रभाव है और वो इन्हें जलवायु परिवर्तन का सामना करने की दिशा में एकसाथ ला सकता है.बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्री लंका, नेपाल जैसे देश भारत की जलवायु में परिवर्तनशीलता की स्थिति में भारी परिवर्तनों से गुजरेंगे, और उनकी जलवायु परिवर्तनशीलता का असर भारत पर भी पड़ेगा. जलवायु परिवर्तन हमारे पड़ोसियों को बक्शने वाला नहीं है और ना ही हमें बक्शने वाला है. आजकल के समय में आपसी मतभेदों को भुलाकर इन देशों को एकसाथ आना चाहिए और इन मुद्दों पर काम करना चाहिए.

- वनवर्ल्ड फाउन्डेशन इण्डिया