मध्य प्रदेश किस प्रकार जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है

सुभेद्यता और अनुकूलन किसी भी जलवायु परिवर्तन कार्य योजना के लिए मुख्य गतिविधियाँ हैं. भारत ने जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना सन २००८ में घोषित की. इसका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के प्रति सुभेद्यता और साथ ही अनुकूलन व शमन हेतु एवं क्षेत्रवार (सेक्टोरल) कार्यक्रम विकसित करना है. जलवायु परिवर्तन नीति के एक अंग की भाँति विभिन्न राज्यों से अपेक्षा की गयी है कि वे अपनी अपनी कार्य योजनायें दें जो कि राष्ट्रीय कार्ययोजना की रूपरेखा के अनुरूप हों. 

राज्यवार प्राथमिकता सूची को देखते हुए, मध्यप्रदेश जो कि “भारत का ह्रदय” है, अपनी बहत्तर प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या के साथ अपने अधिकाँश क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के उतार चढ़ाव के लिए बहुत अधिक सुभेद्य है. चारों ओर से अन्य राज्यों से घिरा यह प्रदेश प्राकृतिक खनिजों से समृद्ध है और कई मुख्य नदी कछारों से युक्त है. इसके ग्यारह कृषि जलवायुवीय क्षेत्र, पांच कृषि-पारिस्थितिकीय क्षेत्र, नौ राष्ट्रीय पार्क एवं पच्चीस वन्य-जीव अभ्यारण्य इसे जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध बनाते हैं. राज्य की प्रति व्यक्ति आय कम है, प्रति व्यक्ति ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन भी कम (०.६६ टन) है और इसका देश के सकल घरेलू उत्पाद में अन्य राज्यों की तुलना में मध्यम योगदान है, इस प्रकार यह विकास के मार्ग पर बढ़ रहा है.  

राज्य कार्य योजना: मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन हेतु राज्य कार्य योजना का निर्माण राज्यस्तरीय नोडल एजेंसी “जलवायु परिवर्तन इकाई”, मध्यप्रदेश शासन ने किया है. इसका गठन २००९ में पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संस्था द्वारा आवास व पर्यावरण विभाग के अंतर्गत किया गया है. इकाई ने “नीचे से ऊपर की ओर वाली शैली” (बाटम अप अप्रोच) द्वारा राज्य कार्य योजना का निर्माण किया है जिसमे ग्यारह कृषि जलवायुवीय क्षेत्रों के अकादमिक विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थाओं, शासकीय विभागों, समाज के प्रतिनिधियों सहित अन्य हितग्राहियों के साथ अनेकों विमर्श गोष्ठियों, कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है. चूंकी जलवायु परिवर्तन विभिन्न भूभागों में अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करेगा, मध्यप्रदेश शासन व यूएनडीपी के अंतर्गत विकसित यह कार्य योजना प्रत्येक महत्वपूर्ण हितग्राही के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराती है. इसका मुख्य जोर क्षमता वर्धन और कुशल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर है.  

नीतिगत सुधारों की पहचान, संस्थागत व्यवस्था, हितग्राहियों की सहभागिता, क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन सुभेद्यताओं का आकलन करना आदि इस कार्य योजना के मुख्य बिन्दुओं में शामिल है. विभिन्न अंतरक्षेत्रीय योजनाओं व विकास परियोजनाओं में जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को मुख्यधारा में लाना एक रणनीतिक उपाय है. यद्यपि सदी के अंत तक के जलवायु परिवर्तन अनुमान संबंधी क्षेत्रीय जलवायु माडलिंग अध्ययन के अभाव में कुछ जिलों की अनुमानित सुभेद्यता अन्यों की तुलना में अधिक पायी गयी है. कुछ जिलों में सुभेद्यता मापक के आधार पर जिलेवार वर्गीकरण किया गया है जो कि अधिक प्रभावी अनिकूलन उपायों की मांग करता है.  

जलवायु परिवर्तन पर राज्य ज्ञान प्रबंधन केंद्र (SKMCCC)  द्वारा पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन विषयक अति महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान करने की परिकल्पना की गई है. यह नीति-निर्माताओं को क्रियान्वयन हेतु रणनीतिक चुनाव के लिए सर्वोत्तम उपकरणों के विकास का प्रस्ताव करता है. उदाहरण के लिए क्षेत्रीय ग्रीन हाउस गैस इन्वेंटराईजेशन और मार्जिनल एबेटमेंट कास्ट कोर्सेस (MACC) का विकास करना.  

खनिज आधारित व गैर खनिज आधारित उद्योग दोनों ही बड़े और मझौले उद्योग हैं. ‘राष्ट्रीय उन्नत ऊर्जा दक्षता मिशन’ को दृष्टिगत रखते हुए बेहतर क्रियान्वयन,उपलब्धि, और औद्योगिक प्रक्रियाओं से जुड़े उपायों को अपनाने की दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं, ताकि अधिक ऊर्जा दक्ष सुधार हासिल किये जा सकें.   इस सम्बन्ध में अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ विकास का प्रचार और क्षमता वर्धन की आवश्यकतायें मुख्य मुद्दे में शामिल हैं. यह राज्य कार्य योजना, राज्य की औद्योगिक नीति २००४ और राज्य की खनिज नीति १९९५ के नवीनीकरण की आवश्यकता को शामिल करती है ताकि इनमे जलवायु परिवर्तन संबंधी चिंताओं का समन्वय किया जा सके. 

राज्य कार्य योजना: क्षेत्रवार उपाय 
आर्थिक वैश्वीकरण के इस दौर में, आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक मुख्य चालिका शक्ति है.  ऊर्जा क्षेत्र में मध्य प्रदेश के पास ८३२४ मेगा वाट क्षमता है, फिर भी ऊर्जा की कमी जाहिर है. अगले पांच सालों में ११००० मेगावाट क्षमता वृद्धि के लिए कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन को सम्बंधित नीतियों द्वारा लक्ष्यित किया गया है ताकि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सके. 

तकनीक विकास दक्षता में सुधार, कार्बन केप्चर और भंडारण द्वारा कार्बन न्यून मार्गों का विकास एवं स्वच्छ इन्धन अपनाने को एक रणनीति की तरह पहचाना गया है. अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी यद्यपि अभी भी लगभग तीन प्रतिशत है, जो कि कम है.  जैव इंधन और सौर ऊर्जा उत्पादन की दिशा में कहीं अधिक शोध, विकास और प्रयोग की आवश्यकता है.  

राज्य की ग्रामीण जनसँख्या बदलते कृषि प्रारूप, असमान वर्षा और सूखे के प्रति सुभेद्य है. जलवायु परिवर्तन जनित स्वास्थ्य समस्याएं इनमें और योगदान दे रही हैं. पंचायत की वार्षिक योजनाओं में जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को संस्थागत प्रक्रियाओं में स्थान देना एक अच्छी रणनीति है जो एक आश्वासन पैदा करती है. इस सन्दर्भ में, जी आई जेड संस्था समर्थित परियोजना के अंतर्गत एक शुरुआत की गयी है. इसमे स्थानीय पंचायत और सामुदायिक सहभागिता के साथ आजीविका के टिकाऊ प्रारूप को अपनाने की पहल की गयी है. वन वर्ल्ड फाउंडेशन द्वारा मंडला के निवास और बिछीया विकास खंड की केस स्टडी, ग्रामीण संस्थागत माडल की प्रभावशीलता को व्यक्त करती है. एसे माडलों को नीतिगत उपायों के द्वारा दोहराने की आवश्यकता है ताकि टिकाऊ विकास, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खतरों की चुनौतियों का सामना किया जा सके.    
राज्य कार्य योजना विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि, वानिकी, पशुपालन, जल व स्वास्थ्य में सुधार के लिए रणनीतियों की हिमायत करती है. राज्य के स्वच्छ एवं भूमिगत जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बेहतर जल संसाधन प्रबंधन, सब स्तरों पर जल संरक्षण विकास व बचत एक उच्च प्राथमिकता का विषय है. 

जलवायु परिवर्तन के प्रति लोचशील राज्य की और कदम 

शहरों की ओर पलायन, शहरी विकास व प्रशासन इत्यादि कुछ अन्य मुद्दे हैं जो जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण हैं. शहरों व गावों में ऊर्जा की खपत बढ़ती जा रही है. शहरी विकास नियोजन में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए धारणीय शहरी विकास, पर्यावरण हितैषी स्थापत्य (ग्रीन बिल्डिंग), झील संरक्षण व पौधारोपण की बड़ी आवश्यकता है. राज्य की विकास योजनाओं के साथ समन्वय सुनिश्चित करना एक महती आवश्यकता है. यह कार्ययोजना इस बात को रेखांकित करती है कि विभिन्न संस्थाओं के बीच प्रत्येक कार्य के लिए अपनी भूमिका के प्रति स्पष्टता बनी रहे. लक्ष्य आधारित वित्त एवं संसाधन प्रदाय बेहतर क्रियान्वयन में मदद करेगा. 
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक लोचशील राज्य की ओर राज्य कार्य योजना एक स्पष्ट कार्य योजना का प्रस्ताव करती है जो जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को उत्तर देती है. पांच वर्षों में लागू होने वाली गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए अनुमानित बजट का इसमें उल्लेख किया गया है. सब गतिविधियों में नीतिगत सुधार को सर्वोपरि माना गया है.  यह आवश्यक है कि टिकाऊ विकास रणनीतियों के सफल क्रियान्वयन हेतु अन्तर्विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जाए.  राष्ट्रीय नीतियों में भी प्राथमिकताएं बदल रही हैं और जनता के बीच जागरूकता बढाने की आवश्यकता है. जैसा कि कहा जाता है कि – स्थिति की भयावहता को बतान के लिए ‘जलवायु परिवर्तन’ सही शब्द नहीं है, इस पर येल सेंटर ओन क्लाइमेट चेंज कमुनिकेशन कहता है कि अधिक उपयुक्त शब्द यह होंगे कि ‘आप जलकर मरेंगे’. 


लेखक DST की पूर्व सलाहकार है. सम्प्रति जलवायु परिवर्तन शोध संस्थान की कार्यकारी निदेशक हैं एवं वन वर्ल्ड फाउंडेशन से मध्य प्रदेश नालेज पोर्टल हेतु एक वरिष्ठ सलाहकार की भाँती सम्बद्ध हैं

प्रकाशित तिथि:जून 12, 2014
सभी चित्र को देखें
मध्य प्रदेश किस प्रकार जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहा है