भोपाल नगर निगम ने ‘टीम अप टू क्लीन अप’ के जरिए ठोस कचरा प्रबंधन को किया साकार

शहरों में नागरिकों के जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए ठोस कचरे का प्रबंधन बहुत जरूरी है। भारत में शहरी विकास के क्षेत्र में यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कचरे का ठीक प्रबंधन और निराकरण नहीं होने पर यह ना सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जल जनित बीमारियों करता है साथ ही मानव जीवन को भी कई तरह की चुनौतियां पैदा करता है। लगातार बढ़ती आबादी के साथ यह और भी जरूरी हो गया है कि शहरों के कचरे का प्रबंधन उचित तरीके से किया जाए, और शहरों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सक्षम बनाया जाए।

भोपाल शहर में भोपाल नगर निगम (बी.एम.सी.) ने कचरा प्रबंधन के लिए जो उपाय किए, उसका पूरा ब्योरा ‘टीम अप टू क्लीन अप’ केस स्टडी में शामिल किया गया है। 1 से 22 मार्च, 2014 को चले पहले चरण के अभियान के दौरान बड़े स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकी। बीएमसी ने घर-घर तक जा कर ठोस कचरा जमा करने की व्यवस्था लागू की। साथ ही कचरा इकट्ठा करने के स्रोत पर ही जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था भी शुरू की। बी.एम.सी. ने सांस्कृतिक परंपरा का ध्यान रखते हुए पर्यावरण-हितैषी (‘इको-फ्रैंडली’) गणेश विसर्जन की व्यवस्था भी की। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहर भर में सघन जागरुकता अभियान चलाया गया।

इस केस स्टडी में शहर को साफ-सुथरा और पर्यावरण को बेहतर बनाने के इस साधारण लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम की उपलब्धियां तो बताई ही गई हैं, साथ ही इस कार्य में आई चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। इस दौरान ढांचागत सुविधाओं की कमी तो आड़े आई ही, कचरा छंटाई के लिए लगाए गए शुल्क पर भी शुरुआत में लोगों ने एतराज किया। ऐसे किसी प्रयास को किसी दूसरे शहर में लागू करने के लिए ना सिर्फ उच्च स्तरीय प्रशासनिक सहयोग जरूरी होगा, बल्कि नगरपालिका को इस पर लगातार निगरानी और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।

 

संसाधन प्रकार:व्यष्टि अध्ययन
प्रकाशित तिथि:जून 16, 2014
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