पूर्वी मध्य प्रदेश पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: सुशांत, ‘इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फारेस्ट मैनेजमेंट

मध्य प्रदेश स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फारेस्ट मैनेजमेंट’ के सुशांत ने यह शोध आलेख तैयार किया है। इसमें उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन किया है। इस शोध पत्र के जरिए उन्होंने पर्यावरण परिवर्तन से जूझने के लिए अपनाए गए विभिन्न उपायों को सामने लाया है।

सुशांत ने अपने शोध में यह अध्ययन किया है कि इस इलाके में लोगों ने अपनी जीविका को बचाए रखने के लिए किस तरह जरूरी बदलाव किए हैं। यह इलाका 90 फीसदी तक वर्षा जल पर ही निर्भर है। ऐसे में बारिश में लगातार आए बदलाव की वजह से पिछले 15 साल मे यहां की फसल में 60 फीसदी तक की कमी आ गई है। यहां तक कि इस इलाके की खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोगों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए ‘सिस्टम आफ राइस इंटेंसीफिकेशन’ (एसआरआई) और बागवानी का सहारा लिया है।

इसी तरह उन्होंने अपने शोध में पाया है कि इस दौरान एक और उल्लेखनीय बदलाव आया है। पहले जहां इक्का-दुक्का लोग महज शौकिया तौर पर किचन गार्डन लगाते थे, अब यह बेहद पेशेवर तरीके से अपनाया जा रहा है।

उधर, साझा भूमि पर बढ़ते दबाव की वजह से एक ओर जलावन का संकट बढ़ गया है, वहीं जानवरों का चारा भी कम हो गया है। इलाके में ‘नान टिंबर फारेस्ट प्रोडक्ट’ (एनटीएफपी) की उपलब्धता लगातार घटती गई है। लेकिन महुआ पर इसका असर नहीं पड़ा है। क्योंकि इसके उपयोग पर समुदाय की नजर रहती है।

 

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संसाधन प्रकार:शोध अध्ययन
प्रकाशित तिथि:जून 11, 2014
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