जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में मध्य प्रदेश की सुभेद्यता का आकलन

यह पुस्तिका जलवायु परिवर्तन के मध्य प्रदेश राज्य पर पड़ने वाले असर के आकलन के लिए किए गए अध्ययन का नतीजा है। यह अध्ययन भारत के ग्रामीण इलाकों में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बदलावों पर वन और पर्यावरण मंत्रालय व जी.आई.जेड. के प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। यह पहल इस सोच के साथ शुरू की गई है कि राज्य में जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना करने के लिए अनुकूलन (एडाप्टेशन) के प्रयास बेहद जरूरी हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि वल्नरेबलिटी एसेसमेंट (सुभेद्यता का आकलन) राज्य को अनुकूलन की मजबूत रणनीति तैयार करने में सहायक होगा। साथ ही विकास योजनाओं में भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का पूरा ध्यान रखा जा सकेगा। इसी वजह से राज्य सरकार इस अध्ययन में शामिल हुई है। इस अध्ययन को शुरू करते समय इस बात का खास तौर पर ध्यान रखा गया है कि राज्य स्तर पर ऐसे व्यापक आकलन के लिए सही अध्ययन प्रक्रिया अपनाई जाए। इस आकलन से संबंधित सभी व्यक्तियों, वर्गों, और संस्थानों को इसमें शामिल किया जाए। साथ ही इस अध्ययन के तहत राज्य के विभिन्न कार्यक्षेत्रों और स्थानों से अलग-अलग समय में जरूरी आंकड़े इकट्ठा करने पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है।

जलवायु परिवर्तन संबंधी मध्य प्रदेश की संवेदनशीलता के आकलन की पूरी रिपोर्ट अंग्रेजी में पढ़ने के लिए पीडीएफ यहां से डाउनलोड करें-

संसाधन प्रकार:प्रकाशन
प्रकाशित तिथि:जून 6, 2014
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