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अनुकूलन और शमन में क्या अंतर है?

अनुकूलन और शमन दो महत्वपूर्ण तरीके हैं जिनसे हम जलवायु परिवर्तन के खतरों का सामना कर सकते हैं.

अनुकूलन का सरल भाषा में मतलब है कि जिस तरह के मौसमी बदलाव रोके नहीं जा सकते उन बदलाओं के हिसाब से अपनी आने वाली जिन्दगी में हम खुद बदलाव लायें और उन मौसमी बदलावों के साथ ठीक ढंग से जीना सीख लें. शमन का अर्थ है इस तरह के मौसमी बदलाव जिस कार्बन उत्सर्जन के कारण आ रहे हैं उस कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए जरुरी उपाय करें. इन उपायों में ऊर्जा की बचत, कार्बन और अन्य हानिकारक तत्वों के उत्सर्जन पर रोक, स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों का प्रयोग, पेड़ लगाना इत्यादी अनेक उपाय शामिल हैं. हम अपनी दैनिक जिन्दगी की आदतों में बदलाव लाकर और रोजाना ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बचत करके शमन की प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकते हैं.

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जलवायु परिवर्तन किस तरह हमारी खेती के तरीकों को बदल रहा है?

जलवायु परिवर्तन किसी स्थान के औसत मौसम में होने वाला लम्बे समय का बदलाव है. इसका ये भी अर्थ है की उस इलाके में अभी तक लम्बे समय से बना हुआ अनुकूल तापमान दशाओं की स्थिति अब उस स्थान से विस्थापित हो रही है. इस तरह पहले जिस तरह का तापमान वहां हुआ करता था अब वह वहां नही रह जाने वाला है. इस तरह बदली हुई मौसम की दशाओं में फसलों के उगाने के तौर तरीकों और उत्पादन की मात्रा पर असर पड़ने लगता है.  इससे लगातार कई सालों तक फसल खराब होना या कम उत्पादन की स्थिति बन सकती है. जिसके कारण स्थानीय किसान या तो उन फसलों की बजाय दूसरी फसलों को बोने का निर्णय ले सकते हैं. या अपने तौर तरीकों में अन्य किसी तरह का बदलाव लाने के लिए मजबूर हो सकते हैं. मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में ये घटना देखी जा रही है. जहां पहले जहां सोयाबीन की फसल अच्छे होती थी अब वहां बदली हुई बारिश की दशाओं के कारण किसान धान की फसल बोने लगे हैं. तेज और अचानक बारिश की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण सोयाबीन की फसल कई सालों से खराब होने लगी है.

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मौसमी फसलों को जलवायु परिवर्तन किस तरह प्रभावित करता है ?

उत्तर- सभी पेड़ पौधों और फसलो पर मौसम और वायुमंडलीय दशाओं में बदलाव का असर पड़ता है. औसत तापमान, नमी, बारिश इत्यादी से ही किसी स्थान पर किसी फसल की उत्पादकता तय होती है. अब जलवायु परिवर्तन इन्ही दशाओं को बदल देता है, और मौसम की भयानक स्थितियां निर्मित होने लगती हैं. इसलिए इन बदली हुई दशाओं में उत्पादन पर असर पडना स्वाभाविक है. इस तरह स्वयं मौसम में ही बदलाव आ जाता है. इससे लगातार कई सालों तक फसलें खराब होना, उपज का कम होना आदि घटनाएं होने लगती हैं.

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जलवायु परिवर्तनशीलता क्या है?

 जलवायु परिवर्तन और जलवायु परिवर्तनशीलता में अंतर है. जलवायु परिवर्तन किसी बड़े भूभाग के औसत मौसम में बदलाव की सदियों लम्बी प्रक्रिया का परिणाम है. जबकि जलवायु परिवर्तनशीलता बहुत कम समय में मौसमी दशाओं में आने वाले उतार चढ़ाव का नाम है. इस तरह मौसम में सालाना उतार चढ़ाव जलवायु परिवर्तनशीलता कही जा सकती है.

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