रेड प्लस द्वारा निर्मित भारत सम्बन्धी फिल्म

यह फिल्म नार्वे के विदेश मंत्रालय और भारत के द एनर्जी रिसोर्स इंस्टिट्यूट (टेरी) द्वारा एक फ्रेमवर्क समझौते के अंतर्गत तैयार की गयी है. यह फिल्म उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के निवासियों द्वारा जलाऊ लकड़ी के लिए जंगलों की बेतरतीब कटाई के व्यवहार पर केन्द्रित है. यह फिल्म इस व्यवहार में आये एक अच्छे परिवर्तन को उजागर करती है और इस बदलाव से उपजने वाली एक महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि को साझा करती है. सोनभद्र निवासियों द्वारा बिना सोचे समझे पेड़ काटने के व्यवहार में बदलाव आना और उनकी पारम्परिक जरूरतों के लिए सोच विचार करके उन्ही संसाधनों को संरक्षित करने का प्रयास करना एक नया बदलाव है. इसके जरिये रेड प्लस के अंतर्गत होने वाले लाभ भी लिए जा सकते हैं और साथ ही साथ वन आच्छादन में भी बढ़ोतरी होने लगती है. इस दिशा में उन लोगों के प्रयासों से वन संपदा और आजीविका दोनों की बेहतर रक्षा हुई है. यह फिल्म आगे बहुत बारीकी और विस्तार से यह भी बतलाती है कि किस प्रकार रेड प्लस के माध्यम से बेहतर फायदा लिया जाए और वन संरक्षण किया जाए.

विषय-वस्तु: वानिकी