जौ व जई से जलवायु परिवर्तन से निपटने का प्रयास:संतोष सारंग

भारत में कृषि क्षेत्र में भी ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से निपटने के कुछ गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। कुछ विशेष तरह के पेड़ पौधों और फसलों का तापमान नियंत्रित करने में बड़ा योगदान होता है. इन्हें ढूंढकर और बड़े पैमाने पर इन्हें उगाने का प्रयास एक अच्छा विकल्प बन सकता है. इसी बात को लेकर बिहार सरकार का कृषि विभाग तापमान को नियंत्रित रखने वाली खरीफ व रबी की चार फसलों जौ, जई, मंडुआ व बाजरे से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को तेज करने जा रहा है।

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में इन चारों फसलों को शामिल किया है, ताकि किसान इन फसलों को उगा कर पर्यावरण मित्र की अहम भूमिका निभा सके। दरअसल, जौ व जई की खेती में लागत कम होने के साथ रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग भी नहीं करना पड़ता है। इन फसलों को पानी भी अधिक नहीं चाहिए। लिहाज़ा इसकी खेती से पानी का बचत भी होगा। इन फसलों को लगाने लिए विभाग ने किसानों को प्रोत्साहन देने का मन बनाया है।

जौ व जई की खेती के लिए 1600 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुज़फ़्फ़रपुर के जिला कृषि पदाधिकारी के के शर्मा कहते हैं ‘‘राज्य सरकार ने टीडीसी को जौ व एनएससी को जई का बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस फसल की पानी कीटनाशक और खाद इत्यादि की मांग अन्य फसलों के मुकाबले कम है और किसानों पर भी इसका बोझ कम ही पड़ता है |

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संसाधन प्रकार:प्रकाशन
प्रकाशित तिथि:जून 11, 2014
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जौ व जई से जलवायु परिवर्तन से निपटने का प्रयास