जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण खेती में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए सूचना के उपयोग पर बुंदेलखंड क्षेत्र से केस स्टडी: डेवलपमेंट अल्टर्नेटिव्स

जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र में कौन से बदलाव किए जा सकते हैं, इसको ले कर कई विशेषज्ञ एजेंसियां स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (एडाप्टेशन) को ले कर इनकी ओर से आंकड़े और विकल्प पेश किए जाते हैं। लेकिन खेतों में काम कर रहे सामान्य किसानों तक उसे कैसे पहुंचाया जाए, कैसे उन सूचना का आसान विश्लेषन किया जाए और किस तरह उसे इस्तेमाल करने लायक बनाया जाए। इस संबंध में मध्य भारत में स्थित बुंदेलखंड में ‘डेवलपमेंट अल्टर्नेटिव्स’ की ओर से चलाए जा रहे दो प्रोजेक्ट का अध्ययन किया गया है।

यह अध्ययन बताता है कि किस तरह अनुकूलन के संबंध में निर्णय तक पहुंचने के लिए विभिन्न तरह के स्रोतों से उपलब्ध सूचना का उपयोग किया जाता है। साथ ही इसके जरिए हम जान सकते हैं कि उन सूचना का उपयोग किस तरह किया गया। कृषि क्षेत्र में अनुकूलन संबंधी फैसले लेते समय क्या चुनौतियां सामने आती हैं, इसके बारे में भी यहां आसानी से समझा जा सकता है। इस प्रकाशन के जरिए हम जान सकते हैं कि इन दोनों प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों ने इस संबंध में उपलब्ध आंकड़ों को एकत्र करने, उनका मिलान करने और विश्लेषण करने में क्या तरीका अपनाया। साथ ही इस पूरी प्रक्रिया के बाद जिस समाधान तक वे पहुंचे, उसे किसानों तक आसान रूप से कैसे पहुंचाया गया, यह भी हम इन उदाहरणों के जरिए जान सकते हैं।

यह अध्ययन करने वाले मुस्तफा अली खान, आनंद कुमार और के. विजया लक्ष्मी ‘डवलपमेंट अल्टर्नेटिव्स’ से जुड़े हैं। इसी तरह प्रकाशन से पहले कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इसकी समीक्षा की है। यह अध्ययन ‘वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट’ के प्रोजेक्ट ‘दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन अनकूलन संबंधी सूचना: उपयोगकर्ता की जरूरतों की पहचान’ के तहत किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत शामिल सभी केस स्टेडी को प्रकाशित करने के मुख्य रूप से दो उद्देश्य रखे गए हैं। इसका पहला उद्देश्य है कि यह बताया जा सके कि अनुकूलन संबंधी फैसलों में सूचना का किस तरह उपयोग किया जा सकता है। इसी तरह यह भी कोशिश की गई है कि सरकार और विकास योजनाओं में उसके साझेदार जलवायु परिवर्तन के खतरों के बारे में सूचना देने वाले तंत्र को विकसित करने में भी निवेश कर सकें। यह केस स्टडी श्रंखला यूके के ‘डिपार्टमेंट फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट’ के सहयोग से पूरी की गई है।

इस प्रोजेक्ट के तहत जिन किसानों से संपर्क किया गया, उन्हें मौसम के उतार-चढ़ाव के बारे में तो अच्छे से पता था, मगर इसमें होने वाले दीर्घकालिक बदलाव के बारे में उन्हें आश्वस्त करना आसान नहीं था। इसलिए इस टीम ने कई तरह के अनूठे प्रयास किए। इसने कम्यूनिटी रेडियो और गांवों में रीयलिटी शो आदि आयोजित कर किसानों को जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभाव और उसके खतरे के बारे में समझाने का प्रयास किया। ऐसे प्रयासों के प्रभाव का आकलन करते हुए पाया गया कि सूखे को झेल सकने वाले बीज का इस्तेमाल करने से फसल में दस फीसदी तक का इजाफा हुआ। इसी तरह पारंपरिक सिंचाई की बजाय स्प्रिंकल आधारित सिंचाई के जरिए पानी का उपयोग 30 फीसदी तक घट गया।

 

बुंदेलखंड में खेती में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए सूचना के उपयोग पर प्रकाशित इस केस स्टडी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए पीडीएफ यहां से डाउनलोड करें:

संसाधन प्रकार:व्यष्टि अध्ययन
प्रकाशित तिथि:जून 11, 2014
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